- Home
- /
- राज्य
- /
- उत्तर प्रदेश
- /
- दूध के टैंकरों के साथ...
उत्तर प्रदेश
दूध के टैंकरों के साथ मिले संदिग्ध पदार्थ, हरदोई की डेयरी का लाइसेंस निलंबित
nidhi
20 Oct 2026 8:38 AM IST

x
हरदोई में दूध के नाम पर मिलावट का खेल
हरदोई: संडीला औद्योगिक क्षेत्र में दूध में मिलावट के संदेह में हुई छापेमारी के बाद अब प्रयोगशाला जांच में नमूने फेल होने की जानकारी सामने आई है। डेयरी से लिए गए दूध के चार नमूनों सहित सभी सात नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। इसके बाद खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने संबंधित डेयरी का लाइसेंस निलंबित कर कारोबार पर रोक लगा दी है। प्रशासन की शुरुआती कार्रवाई में करीब 38 हजार लीटर संदिग्ध दूध और दूध तैयार करने में इस्तेमाल होने की आशंका वाली सामग्री बरामद हुई थी।
सूचना मिलने पर देर रात पहुंची संयुक्त टीम
यह कार्रवाई 13 अक्टूबर की देर रात संडीला औद्योगिक क्षेत्र में की गई थी। प्रशासन को डेयरी में दूध में मिलावट किए जाने की सूचना मिली थी। इसके बाद उपजिलाधिकारी एवं ज्वाइंट मजिस्ट्रेट नारायणी भाटिया के नेतृत्व में प्रशासन, पुलिस और खाद्य सुरक्षा विभाग की संयुक्त टीम मौके पर पहुंची।
परिसर में दूध से भरे दो टैंकर मिले। टीम ने दूध की गुणवत्ता संदिग्ध होने पर उन्हें अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू की। बड़ी मात्रा में दूध और अन्य सामग्री मिलने के बाद खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने अलग-अलग नमूने एकत्र किए। शुरुआती कार्रवाई के समय दूध में मिलावट की अंतिम पुष्टि के लिए प्रयोगशाला रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा था।
पाउडर और रसायनों की बरामदगी से बढ़ा संदेह
छापेमारी के दौरान परिसर से दूध पाउडर की बोरियां और संदिग्ध रासायनिक पदार्थ मिलने की जानकारी सामने आई। शुरुआती विवरण में डिटर्जेंट और अन्य पदार्थों की मौजूदगी का भी उल्लेख किया गया था। इसी आधार पर आशंका जताई गई कि दूध की मात्रा और उसका स्वरूप बदलने के लिए मिलावट की जा रही थी। परिसर से किसी पदार्थ की बरामदगी और दूध में उसके इस्तेमाल की पुष्टि अलग-अलग विषय हैं। किस सामग्री का इस्तेमाल हुआ, कितनी मात्रा में हुआ और उसका उद्देश्य क्या था, इसका निष्कर्ष जांच के साक्ष्यों से निकलेगा। इसलिए बरामद सभी पदार्थों को पूरे जब्त दूध में मिला हुआ मान लेना उचित नहीं होगा। शुरुआती कार्रवाई में भी अधिकारियों ने नमूनों की जांच को निर्णायक बताया था।
दूध और सामग्री के सभी सात नमूने फेल
मामले में बाद में सामने आई जानकारी के अनुसार, जांच के लिए भेजे गए सातों नमूने फेल मिले हैं। इनमें दूध के चार नमूने शामिल थे। दूध को अधोमानक पाया गया। प्रयोगशाला के निष्कर्षों के बाद विभाग ने डेयरी का लाइसेंस निलंबित करते हुए उसके कारोबार को रोक दिया है। यह कार्रवाई शुरुआती संदेह के आधार पर हुई जब्ती से आगे का महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। अब मामले में नमूनों की रिपोर्ट उपलब्ध होने के कारण संबंधित सामग्री और दूध की गुणवत्ता को लेकर विभागीय कार्रवाई का आधार बना है। हालांकि, प्रत्येक नमूने में मिली कमी को अलग-अलग समझना जरूरी है। दूध का अधोमानक पाया जाना अपने आप में उसमें हर कथित रसायन की मौजूदगी की पुष्टि नहीं करता।
लखनऊ और कानपुर तक कारोबारी संपर्कों की पड़ताल
डेयरी से तैयार दूध की आपूर्ति लखनऊ, कानपुर और आसपास के जिलों में किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। शुरुआती जांच में इन शहरों तक दूध भेजे जाने की तैयारी और पुराने कारोबारी संपर्कों का उल्लेख किया गया था। इसके बाद मामले का दायरा डेयरी परिसर के साथ उसके आपूर्ति नेटवर्क तक पहुंच गया। जांच में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि दूध किन खरीदारों के पास जाता था और बरामद खेप कहां भेजी जानी थी। अभी किसी विशेष दुकान, मिठाई प्रतिष्ठान या दूसरी डेयरी को इस मामले में दोषी नहीं माना जा सकता। संबंधित खरीदार की भूमिका उसके खिलाफ उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही तय होगी। शुरुआती विवरण में कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ किए जाने की जानकारी दी गई थी।
संदिग्ध तरल और ठोस पदार्थ भी मिले
कार्रवाई के एक अन्य विवरण के अनुसार, परिसर से करीब 38,210 लीटर मिश्रित दूध बरामद हुआ था। इसके साथ नीले ड्रम में लगभग 10 लीटर संदिग्ध तरल और सफेद ठोस पदार्थ मिलने की बात भी सामने आई। दूध और इन सामग्रियों के कुल सात नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए थे। डेयरी संचालक के खिलाफ मामला दर्ज होने की जानकारी भी दी गई है। इस प्रकरण ने दूध की आपूर्ति व्यवस्था में गुणवत्ता जांच की अहमियत सामने रखी है। बड़ी खेप में दूध का परिवहन होने पर उसकी खरीद, भंडारण और बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड जांच में महत्वपूर्ण होते हैं। इन्हीं से यह समझने में मदद मिलती है कि संदिग्ध सामग्री का स्रोत क्या था और तैयार दूध कहां तक पहुंचा। फिलहाल मामले में प्रमुख कार्रवाई डेयरी का लाइसेंस निलंबित होना और कारोबार पर रोक लगना है। आगे की जिम्मेदारी प्रयोगशाला रिपोर्ट, बरामद सामग्री और आपूर्ति से जुड़े साक्ष्यों के आधार पर तय होगी।
Next Story





